महाराष्ट्र में बिजली कर्मचारियों का आंदोलन स्थगित, अब राज्यभर में उठेंगे लंबित मांगों के मुद्दे
Maharashtra Samachar••1 व्यूज़•7 मिनट पढ़ें
महाराष्ट्र में बिजली तकनीकी कर्मचारी यूनियन ने 22 से 24 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला धरना स्थगित किया। वेतनवृद्धि, ईंधन भत्ता, भर्ती और कर्मचारियों की सुविधाओं समेत 15 मांगों को लेकर अब राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा।
नागपुर: महाराष्ट्र में बिजली तकनीकी कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज नागपुर जिला बिजली तकनीकी कर्मचारी सहकारी पतसंस्था से जुड़ी तकनीकी कामगार यूनियन ने अपना आंदोलन व्यापक करने का फैसला लिया है। यूनियन ने 22, 23 और 24 सितंबर 2026 को मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला धरना फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब इन मांगों को लेकर राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर बैठकों में चर्चा होती है और कार्रवाई का आश्वासन भी दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर मांगों का समाधान नहीं होता। इसी वजह से संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। यूनियन ने पुरानी मांगों के साथ कर्मचारियों के वेतन, भर्ती, कार्यस्थल पर सुरक्षा और जरूरी सामग्री की उपलब्धता से जुड़े कई नए मुद्दे भी शामिल किए हैं।
बैठकों में आश्वासन मिला, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
यूनियन के मुताबिक, 16 जुलाई 2025 और 23 फरवरी 2026 को हुई बैठकों में कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई थी। 23 फरवरी की बैठक के कार्यवृत्त के आधार पर तीन महीने के भीतर कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगें अब तक लंबित हैं। संगठन ने बताया कि विद्युत सहायकों को ईंधन भत्ता देने और वरिष्ठ तकनीशियन से यंत्रचालक पद पर आंतरिक भर्ती करने की मांग वर्ष 2016 से लंबित है। इन विषयों पर जल्द निर्णय लेने की बात कही जाती रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आंदोलन का नोटिस देने के बाद भी किसी प्रमुख मांग का समाधान नहीं होने से यूनियन ने व्यापक आंदोलन की तैयारी की है।
विद्युत सहायकों को ईंधन भत्ता या दोपहिया वाहन देने की मांग
यूनियन ने मांग की है कि विद्युत सहायकों को बढ़ा हुआ ईंधन भत्ता दिया जाए या उन्हें कामकाज के लिए बिजली से चलने वाले दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए जाएं। संगठन का कहना है कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को आने-जाने और नियमित कामकाज के लिए उचित सुविधा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही वरिष्ठ तकनीशियन से यंत्रचालक पद पर आंतरिक भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की गई है। यूनियन के अनुसार, इस भर्ती का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ है। एक अप्रैल 2019 के बाद शुरू हुए उपकेंद्रों को सुचारु रूप से चलाने के लिए कम से कम एक नियमित यंत्रचालक नियुक्त करने की मांग भी रखी गई है।
एसईबीसी और ईएसबीसी कर्मचारियों की वेतनवृद्धि का मुद्दा
यूनियन ने एसईबीसी और ईएसबीसी श्रेणी के कर्मचारियों को दो वेतनवृद्धियों से वंचित रखने पर सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि सामान्य आदेश 166 (पी), दिनांक 21 जुलाई 2005 में संबंधित पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को दो वेतनवृद्धियां देने का उल्लेख है। इसके बावजूद कुछ कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि नौकरी में नियुक्ति के समय मिलने वाली दो वेतनवृद्धियां और हर साल मिलने वाली नियमित वेतनवृद्धि अलग-अलग विषय हैं। संगठन के अनुसार, कुछ कर्मचारियों का वेतन संरक्षण के दौरान पहले दी गई वेतनवृद्धियों की तीन साल की वसूली भी की गई है, जबकि नए कर्मचारियों को दो वेतनवृद्धियों के लाभ के बिना वेतन दिया जा रहा है। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जाति सत्यापन लंबित होने के कारण अधिसंख्य घोषित किए गए कुछ कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्धि दी जा सकती है, तो एसईबीसी और ईएसबीसी श्रेणी के ऐसे कर्मचारियों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। यूनियन ने इस मामले में स्पष्ट आदेश जारी करने और सभी प्रभावित कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करने की मांग की है।
गलत तरीके से कर्मचारियों की तैनाती पर रोक लगाने की मांग
यूनियन ने उपकेंद्रों को चलाने के लिए अपनाई जा रही पुल व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। संगठन का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ पड़ता है और कामकाज की स्थिति कठिन हो जाती है। यूनियन ने इस तरीके को बंद करने और गलत तरीके से की जाने वाली प्रतिनियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बाहरी स्रोतों से कर्मचारियों की भर्ती होने के बावजूद नियमित कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जाते, वहां कर्मचारियों को पूरा अतिरिक्त समय भत्ता दिया जाए या पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
सुरक्षा उपकरण हैं, लेकिन जरूरी सामग्री की कमी
यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने के बावजूद रोजमर्रा के काम के लिए जरूरी सामग्री और औजार कई बार कार्यस्थल पर नहीं मिलते। इससे कर्मचारियों को परेशानी होती है और काम समय पर पूरा करने में दिक्कत आती है।संगठन ने विशेष रूप से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में पुराने और सड़े हुए बिजली के खंभे तथा पुराने तार बदलने की मांग की है। इसके अलावा ऐसे क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और बदलाव करने पर जोर दिया गया है।
बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए लाइन और रोहित्रों की क्षमता बढ़ाने की मांग
यूनियन के अनुसार, कई जगह एक ही 33 केवी विद्युत वाहक लाइन से अनेक उपकेंद्र जुड़े हैं। कुछ स्थानों पर इसी लाइन से औद्योगिक क्षेत्रों को भी बिजली दी जाती है। इसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या सामने आती है। संगठन ने ऐसी जगहों पर तीन डिस्क विद्युतरोधकों वाली लटकती लाइन बनाने की मांग की है, ताकि बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु हो सके। इसके साथ ही जिन वितरण रोहित्रों पर 30 प्रतिशत से अधिक सौर ऊर्जा उपभोक्ता जुड़े हैं, उनका भार सर्वेक्षण करने की मांग की गई है। यूनियन का कहना है कि जहां भार असंतुलित है, वहां उचित प्रबंधन के साथ रोहित्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए।
महिला कर्मचारियों के लिए शौचालय और सुरक्षा कक्ष की मांग
बिजली विभाग में महिला कर्मचारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यूनियन ने कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, किराये की इमारतों या निजी परिसरों में चलने वाले शाखा कार्यालयों में महिलाओं के लिए तैयार शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए।कंपनी परिसर में मौजूद उपकेंद्रों और शाखा कार्यालयों में भी अलग शौचालय उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा रात की पाली में महिला कर्मचारी की ड्यूटी होने पर सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था को लेकर परेशानी सामने आती है। इसे देखते हुए सभी उपकेंद्रों पर सुरक्षा कर्मियों के लिए अलग कक्ष बनाने की मांग की गई है।
ठेका पद्धति की भर्ती बंद करने या प्रशिक्षण तक सीमित रखने की मांग
यूनियन ने वर्ष 2013 से शुरू की गई सहायक कर्मचारियों की ठेका पद्धति पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इन कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों की तरह काम लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं देने के समय उनके ठेका अवधि में होने का हवाला दिया जाता है। यूनियन ने मांग की है कि सहायक कर्मचारियों की ठेका पद्धति से भर्ती पूरी तरह बंद की जाए या इसे केवल एक साल की प्रशिक्षण अवधि तक सीमित रखा जाए। संगठन के अनुसार, कर्मचारियों के काम और सुविधाओं में इस तरह का अंतर समाप्त होना चाहिए।
पुनर्गठन और तबादला नीति में बदलाव की मांग
यूनियन ने विभागीय पुनर्गठन को सही तरीके से लागू करने की जरूरत बताई है। संगठन के मुताबिक, एक ही नियंत्रण कक्ष के अंतर्गत दो या तीन यार्ड बनाए जाने के बावजूद उनके संचालन और व्यवस्था का उचित नियोजन नहीं किया गया है। इससे कामकाज में परेशानी होती है। इसके अलावा तबादला नीति में बदलाव की मांग भी दोहराई गई है। संगठन का कहना है कि कुछ मंडलों का क्षेत्र सीमित है, जबकि कुछ मंडलों का कार्यक्षेत्र काफी बड़ा है। ऐसे में चिकित्सा संबंधी मामलों को अलग तरीके से देखने की जरूरत है, ताकि सामान्य कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी न हो।
राज्यभर में आंदोलन की तैयारी
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि मुंबई के आजाद मैदान में 22 से 24 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित धरना स्थगित किया गया है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। संगठन अब पुराने मुद्दों के साथ नई मांगों को शामिल कर राज्यभर में आंदोलन करेगा। यूनियन ने प्रशासन से 18 सितंबर 2026 के आंदोलन नोटिस का उचित संज्ञान लेने और लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि केवल बैठकों और आश्वासनों से समस्याएं हल नहीं होंगी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर समयबद्ध निर्णय लेकर उन्हें राहत दी जाएगी।