मुंबई मनपा के शिक्षक-कर्मचारी 27 अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठेंगे, 26 तक मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम
Maharashtra Samachar••2 व्यूज़•5 मिनट पढ़ें
मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 27 अक्टूबर 2026 से आमरण अनशन करेंगे। संघ ने प्रशासन को 26 अक्टूबर तक फैसला लेने का अल्टीमेटम दिया है।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में काम करने वाले शिक्षक, मुख्याध्यापक, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर म्युनिसिपल समर्थ कामगार संघ ने प्रशासन को अंतिम नोटिस दिया है। संघ ने मांग की है कि 26 अक्टूबर 2026 तक सभी प्रमुख मुद्दों पर सकारात्मक फैसला लेकर जरूरी आदेश जारी किए जाएं। ऐसा नहीं होने पर संघ के संस्थापक और महासचिव ऋषिकांत घोसाळकर 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे। संघ का कहना है कि कर्मचारियों के कई प्रशासनिक, आर्थिक और सेवा से जुड़े मामले लंबे समय से लंबित हैं। बार-बार मांग उठाने और अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मुख्याध्यापकों की वरिष्ठता से लेकर खाली पद भरने की मांग
संघ ने पिछले 15 से 20 वर्षों से महानगरपालिका में सेवा देने वाले अनुभवी मुख्याध्यापकों को वरिष्ठता के आधार पर न्याय देने की मांग की है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी के खाली पदों को जल्द भरने और माली तथा रखवाली कर्मचारियों को नियमानुसार आठ घंटे की ड्यूटी देने की मांग भी रखी गई है। अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए लंबित आवेदनों को अधिकतम तीन महीने के भीतर मंजूरी देने की मांग की गई है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आर्थिक दावों, चिकित्सा कारणों से सेवानिवृत्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों का भी जल्द निपटारा करने को कहा गया है।
बीएड वेतनमान और शिक्षा सेवकों के वेतन का मुद्दा
संघ के अनुसार, वर्ष 2019 से लंबित बीएड वेतनमान की अंतिम सूची जल्द जारी की जानी चाहिए। साथ ही राज्य सरकार की तर्ज पर संबंधित वेतनमान लागू करने की मांग की गई है। शिक्षा सेवकों के खाते में नियुक्ति की तारीख और वेतन प्रणाली में दर्ज तारीख के बीच अंतर को दूर करने की मांग भी उठाई गई है। संघ चाहता है कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार सही तारीख दर्ज की जाए। नवनियुक्त शिक्षा सेवकों का वेतन हर महीने की 5 तारीख तक देने के लिए अलग से परिपत्र जारी करने की मांग की गई है।
छुट्टियों और बीएलओ कार्य का भुगतान देने की मांग
संघ ने गर्मी और दिवाली की छुट्टियों के दौरान किए गए काम तथा मतदाता सूची से जुड़े बीएलओ कार्य के बदले अर्जित अवकाश का लाभ सेवा पुस्तिका में दर्ज करने की मांग की है। बीएलओ के रूप में काम करने वाले शिक्षकों का लंबित मानधन भी जल्द देने को कहा गया है। मराठा सर्वेक्षण सहित दूसरे सरकारी कामों के बकाया मानधन का भुगतान करने और भविष्य में ऐसे कामों के भुगतान के लिए स्पष्ट नियम जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा शैक्षणिक भत्ते की फाइलों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा तय करने की मांग भी शामिल है।
दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति और नियमों का लाभ मिले
संघ ने दिव्यांग कर्मचारियों के लिए वर्ष 2016 के परिपत्र और संबंधित कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। पदोन्नति में लंबित रिक्तियों को भरने और इस संबंध में शिक्षा अधिकारी की ओर से अलग परिपत्र जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा महिला शिक्षिकाओं से जुड़े प्रसूति संबंधी लंबित मामलों को नियमों के अनुसार जल्द सुलझाने और माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्राथमिक विभाग की तरह सभी लागू सेवा नियमों का लाभ देने की मांग भी की गई है।
लंबित फाइलों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी जोर
संघ ने वार्ड स्तर पर अटकी अनुकंपा नियुक्ति, गृह ऋण पर चार प्रतिशत सब्सिडी, बाल देखभाल अवकाश और आगे की पढ़ाई के लिए अनुमति से जुड़ी फाइलों को जल्द मंजूरी देने की मांग की है। एक ही वार्ड में तीन साल से अधिक समय से काम कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों और लिपिकों के नियमानुसार तबादले करने की मांग भी रखी गई है।
शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने की मांग
संघ ने आरोप लगाया है कि नियमों के अनुसार किसी एक स्कूल से 40 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को बीएलओ कार्य के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में 90 प्रतिशत तक शिक्षकों को इस काम में लगाया गया। संघ ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।संघ का कहना है कि बीएलओ ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए शिक्षकों को इस जिम्मेदारी से जल्द मुक्त किया जाना चाहिए।
26 अक्टूबर तक फैसला लेने का अल्टीमेटम
संघ ने महानगरपालिका प्रशासन और शिक्षा विभाग से 26 अक्टूबर 2026 तक सभी मांगों पर सकारात्मक फैसला लेने और जरूरी आदेश जारी करने की अपील की है। तय समय सीमा तक ठोस निर्णय नहीं होने पर ऋषिकांत घोसाळकर 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से करी रोड पूर्व स्थित त्रिवेणी संगम महानगरपालिका स्कूल भवन में शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे। संघ ने अनशन के दौरान उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी परिस्थितियों की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और महानगरपालिका प्रशासन पर होने की बात कही है।