मुंबई में कुओं के पुनर्जीवन की पहल तेज, प्रत्येक वार्ड को मिलेंगे 30 लाख रुपये के प्राथमिक फंड
Maharashtra Samachar••1 व्यूज़•5 मिनट पढ़ें
नगरसेवक प्रतीक करपे की पहल को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और भाजपा मुंबई अध्यक्ष विधायक अमित साटम के मार्गदर्शन में मिला बल
महापौर कक्ष में हुई बैठक में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक रहे उपस्थित, आधुनिक तकनीक से पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण पर जोर
कुओं के पानी का उपयोग बागवानी, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक शौचालयों में किया जाएगा, पीने के पानी की बचत में मिलेगी मदद मुंबई, 23 अक्टूबर 2026। मुंबई में संभावित जल संकट से निपटने और वैकल्पिक जलस्रोतों को विकसित करने के उद्देश्य से पारंपरिक कुओं की सफाई और पुनर्जीवन की पहल तेज की जा रही है। नगरसेवक एवं मुंबई भाजपा के सचिव प्रतीक करपे ने इस दिशा में पहल करते हुए महानगरपालिका स्तर पर लगातार प्रयास किए हैं। उनके प्रयासों के बाद मुंबई के कुओं की सफाई और पुनर्जीवन के लिए प्रत्येक वार्ड को 30 लाख रुपये का प्राथमिक निधि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और भाजपा मुंबई अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम के मार्गदर्शन में इन प्रयासों को गति मिली है। इस विषय को लेकर 23 अक्टूबर को महापौर कक्ष में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसरो के पूर्व वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे। मुंबई में पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण और पानी की संभावित कमी से निपटने के लिए कुओं का पुनर्जीवन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत पुराने कुओं की सफाई, उनमें जमा गाद निकालने, आवश्यक मरम्मत करने और उनके पानी का पीने के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग करने की योजना बनाई गई है। प्रतीक करपे ने इस विषय को महानगरपालिका के स्तर पर लगातार उठाया है। उन्होंने महानगरपालिका सदन में प्रस्ताव के माध्यम से भी कुओं के पुनर्जीवन की मांग की थी। सदन के नेता गणेश खणकर ने भी इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाई। इन प्रयासों से मुंबई में वैकल्पिक जलस्रोतों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। प्रत्येक वार्ड को 30 लाख रुपये का प्राथमिक निधि महानगरपालिका की योजना के अनुसार, पहले चरण में प्रत्येक विभाग में खुले कुओं का चयन किया जाएगा। इसके बाद उनकी सफाई, गाद निकालने और आवश्यक मरम्मत का काम किया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित कुएं के लिए 5,000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, दो हॉर्स पावर (एचपी) का पंप और आवश्यक उपकरण लगाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इन कार्यों के लिए प्रति कुआं लगभग 4.82 लाख से 5 लाख रुपये तक का नमूना अनुमानित बजट तैयार किया गया है। जरूरत पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने का भी प्रावधान रखा गया है। प्रत्येक वार्ड के लिए 30 लाख रुपये के प्राथमिक निधि की व्यवस्था से कुओं की सफाई और पुनर्जीवन संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पीने के पानी की बचत, वैकल्पिक जलस्रोतों का होगा उपयोग मुंबई में पानी की बढ़ती मांग और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए कुओं के पानी का इस्तेमाल पीने के अलावा अन्य कार्यों के लिए करने की योजना है। इसके तहत कुओं के पानी का उपयोग उद्यानों और बगीचों में सिंचाई, सड़कों एवं आसपास के परिसरों की सफाई, निर्माण कार्यों और सार्वजनिक शौचालयों में फ्लशिंग के लिए किया जा सकेगा। इससे पीने योग्य पानी की खपत कम करने में मदद मिलेगी और महानगरपालिका के नियमित जलापूर्ति तंत्र पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी घट सकता है। संभावित जल संकट के दौरान ये कुएं वैकल्पिक जलस्रोत के रूप में उपयोगी साबित हो सकते हैं। आधुनिक तकनीक से कुओं, तालाबों और प्राकृतिक जलस्रोतों की पहचान पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रतीक करपे ने मुंबई में मौजूद कुओं, तालाबों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की पहचान एवं संरक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उपग्रह तकनीक, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस मैपिंग) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट जल निगरानी प्रणाली के इस्तेमाल की अवधारणा सामने रखी है। इन तकनीकों की मदद से जलस्रोतों का सर्वेक्षण करने, उनकी उपलब्धता का आकलन करने और भविष्य में उनके उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करने पर ध्यान दिया जाएगा। उपग्रह तकनीक और जीआईएस मैपिंग के माध्यम से जलस्रोतों की स्थिति का पता लगाने तथा आईओटी आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए पानी की उपलब्धता पर नजर रखने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे जलस्रोतों के बेहतर नियोजन और दीर्घकालीन संरक्षण में सहायता मिलने की संभावना है। आगामी गर्मियों में संभावित जल संकट से निपटने की तैयारी मुंबई में बढ़ती आबादी और पानी की मांग के कारण जलापूर्ति व्यवस्था पर लगातार दबाव बना रहता है। ऐसे में पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन, वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था और उपलब्ध पानी का उचित नियोजन महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रतीक करपे की ओर से कुओं के पुनर्जीवन और दीर्घकालीन जल प्रबंधन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य मुंबई में उपलब्ध पारंपरिक जलस्रोतों का बेहतर उपयोग करना और आगामी गर्मियों में संभावित पानी की कमी के प्रभाव को कम करने में मदद करना है। यदि योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो गैर-पेयजल संबंधी जरूरतों के लिए कुओं के पानी का उपयोग बढ़ाया जा सकेगा। इससे पीने के पानी की बचत के साथ-साथ मुंबई में वैकल्पिक जलस्रोतों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। प्रेस विज्ञप्ति जैसी भाषा रखें खबर को और संक्षिप्त बनाएं मुख्य तथ्य शुरुआत में लाएं