मुंबई की नागरिक सेवाओं में बड़े बदलाव की तैयारी, 450 से अधिक परियोजनाओं से जुड़ेगा समाज
Maharashtra Samachar••0 व्यूज़•12 मिनट पढ़ें
मुंबई में नागरिक सेवाओं को अधिक तेज, सरल और जवाबदेह बनाने की तैयारी। ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के जरिए 450 से अधिक परियोजनाओं में उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी होगी।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका शहर की नागरिक सेवाओं को अधिक तेज, सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। इसके तहत ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ परियोजना की शुरुआत के साथ महानगरपालिका और समग्र संस्था के बीच महत्वपूर्ण करार किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में मंगलवार, 6 अक्टूबर को महानगरपालिका मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में यह पहल औपचारिक रूप से सामने आएगी।
इस पहल के जरिए महानगरपालिका की नागरिक जरूरतों को उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों के उपलब्ध संसाधनों व विशेषज्ञता से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता जुटाना नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक, कौशल, सामग्री, उपकरण, सेवाओं और स्वयंसेवी श्रम के माध्यम से मुंबई के विकास में भागीदारी बढ़ाना है।
450 से अधिक परियोजनाएं होंगी उपलब्ध
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के तहत महानगरपालिका के विभिन्न विभाग अपनी जरूरतों और विकास संबंधी परियोजनाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराएंगे। फिलहाल 450 से अधिक परियोजनाएं भागीदारी के लिए उपलब्ध बताई गई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, उद्यान, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में संस्थाएं अपनी क्षमता के अनुसार परियोजनाओं से जुड़ सकेंगी। किसी संस्था के पास तकनीकी विशेषज्ञता है, किसी कंपनी के पास आधुनिक उपकरण हैं, किसी विशेषज्ञ के पास विशेष ज्ञान है या कोई नागरिक अपना समय और कौशल देना चाहता है, तो उसे संबंधित जरूरत से जोड़ने की व्यवस्था इस मंच के माध्यम से की जाएगी।
केवल महानगरपालिका की परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा मंच
इस पहल की खास बात यह है कि भागीदार संस्थाएं केवल महानगरपालिका की ओर से उपलब्ध कराई गई परियोजनाओं में ही हिस्सा नहीं लेंगी। वे मुंबई के लिए अपनी नई योजनाएं, तकनीकी समाधान और सामाजिक पहल भी प्रस्तावित कर सकेंगी। इन प्रस्तावों की संबंधित महानगरपालिका विभागों द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक जांच की जाएगी। उपयोगिता, व्यवहार्यता और शहर की वास्तविक जरूरतों से संबंध की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे महानगरपालिका और निजी तथा सामाजिक क्षेत्र के बीच मिलकर नए समाधान विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।
27 कंपनियां और 23 स्वयंसेवी संस्थाएं जुड़ीं
महानगरपालिका के अनुसार, कम समय में ही 27 सामाजिक उत्तरदायित्व भागीदार, 23 स्वयंसेवी संस्थाएं, 56 कार्यान्वयन भागीदार और 500 से अधिक स्वयंसेवक इस पहल से जुड़ चुके हैं। कई बड़ी कंपनियों ने भी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर मुंबई के लिए प्रस्ताव दिए हैं। इनमें एचयूएल, आरपीजी, सीएमएस और नारायणा जैसी संस्थाएं शामिल हैं। संबंधित महानगरपालिका विभाग इन प्रस्तावों की जांच कर रहे हैं।
सामाजिक उत्तरदायित्व का पैसा सीधे महानगरपालिका को नहीं
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व की राशि सीधे महानगरपालिका को स्वीकार या हस्तांतरित करने के बजाय वस्तुओं, उपकरणों, तकनीक, सेवाओं, विशेषज्ञ ज्ञान, कौशल और परियोजना क्रियान्वयन जैसे प्रत्यक्ष योगदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि भागीदार संस्थाएं अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को सीधे उन परियोजनाओं से जोड़ सकें, जहां मुंबई में वास्तविक जरूरत मौजूद है।
नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ
महानगरपालिका का कहना है कि इस पहल का अंतिम लाभ मुंबई के नागरिकों को मिलेगा। स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, उद्यानों, सार्वजनिक स्थानों, स्वच्छता व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञता मिलने से सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय जरूरत के आधार पर परियोजनाएं तैयार होने से अलग-अलग इलाकों की समस्याओं पर अधिक प्रभावी तरीके से काम किया जा सकेगा।
महानगरपालिका और समग्र संस्था के बीच होगा करार
नागरिक सेवाओं में प्रशासनिक सुधार के लिए महानगरपालिका समग्र संस्था के साथ करार करने जा रही है। इसका उद्देश्य सेवा देने की मौजूदा प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा कर उनमें आवश्यक सुधार करना है। महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक अधिकार, जिम्मेदारी और अंतिम निर्णय लेने की शक्ति उसके पास ही रहेगी।
शिकायतों के निपटारे पर विशेष जोर
सुधार प्रक्रिया के तहत नागरिकों की शिकायतों और सहायता की मांग पर समयबद्ध कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। आग, बाढ़, चिकित्सा आपदा या अन्य आपात स्थितियों में अलग-अलग विभागों और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की तैयारी है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एकीकृत शिकायत प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जाएगी।
कम कागजी कार्रवाई और कम कार्यालयी चक्कर
नागरिकों और कारोबारियों के लिए महानगरपालिका से जुड़ी सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी। अनावश्यक दस्तावेज, कार्यालयों के चक्कर और प्रतीक्षा अवधि कम करने पर जोर रहेगा। जहां संभव होगा, सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। नागरिकों को आवेदन या शिकायत की स्थिति की जानकारी भी अधिक स्पष्ट तरीके से उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
अधिकारियों के कामकाज की होगी निगरानी
प्रभाग स्तर से लेकर महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों तक कामकाज की निगरानी के लिए वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे, सेवाओं की स्थिति और विभिन्न विभागों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा संभव होगी। जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और अन्य उपाय किए जाएंगे।
मिशन के रूप में लागू होगी सुधार प्रक्रिया
महानगरपालिका के अनुसार, प्रशासनिक सुधार को चरणबद्ध तरीके से नहीं बल्कि लक्ष्य आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। कम और मध्यम अवधि में ऐसे परिणाम हासिल करने पर जोर रहेगा जिन्हें मापा जा सके और जिनका असर नागरिकों को सीधे महसूस हो। तेज शिकायत निवारण, आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई, कम कागजी कार्रवाई, कम प्रतीक्षा, आसान सेवाएं और अधिक जवाबदेह कार्यप्रणाली इसके प्रमुख लक्ष्य होंगे।
स्वयंसेवकों को भी मिलेगा मौका
मुंबई के विकास में समय, ज्ञान और कौशल के माध्यम से योगदान देने वाले नागरिक भी इस पहल से जुड़ सकेंगे। शिक्षा, तकनीक, पर्यावरण, स्वास्थ्य, जागरूकता, कौशल विकास और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवी योगदान लिया जा सकेगा। युवा, विद्यार्थी, विशेषज्ञ, पेशेवर और सेवानिवृत्त अनुभवी लोग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकेंगे। भागीदारी करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रमाणपत्र, सम्मान और सार्वजनिक पहचान देने की भी व्यवस्था की जाएगी।
उद्देश्य—‘मेरी’ नहीं, ‘हमारी’ मुंबई
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ का व्यापक उद्देश्य मुंबई के विकास को केवल महानगरपालिका की जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए समाज के अलग-अलग वर्गों को उससे जोड़ना है। महानगरपालिका के पास शहर की जरूरतों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जानकारी है, जबकि उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और नागरिकों के पास ज्ञान, कौशल, तकनीक और अन्य संसाधन हैं। इन दोनों क्षमताओं को एक मंच पर लाकर शहर की समस्याओं के नए और टिकाऊ समाधान तैयार करने की कोशिश की जा रही है। महानगरपालिका का मानना है कि इस पहल से नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और उद्योग जगत की भागीदारी को संस्थागत रूप मिलेगा। इससे वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए भी नए समाधान विकसित किए जा सकेंगे।
मुंबई में नागरिक सेवाओं को अधिक तेज, सरल और जवाबदेह बनाने की तैयारी। ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के जरिए 450 से अधिक परियोजनाओं में उद्योग, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी होगी।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका शहर की नागरिक सेवाओं को अधिक तेज, सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। इसके तहत ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ परियोजना की शुरुआत के साथ महानगरपालिका और समग्र संस्था के बीच महत्वपूर्ण करार किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में मंगलवार, 6 अक्टूबर को महानगरपालिका मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में यह पहल औपचारिक रूप से सामने आएगी।
इस पहल के जरिए महानगरपालिका की नागरिक जरूरतों को उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों के उपलब्ध संसाधनों व विशेषज्ञता से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता जुटाना नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक, कौशल, सामग्री, उपकरण, सेवाओं और स्वयंसेवी श्रम के माध्यम से मुंबई के विकास में भागीदारी बढ़ाना है।
450 से अधिक परियोजनाएं होंगी उपलब्ध
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के तहत महानगरपालिका के विभिन्न विभाग अपनी जरूरतों और विकास संबंधी परियोजनाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराएंगे। फिलहाल 450 से अधिक परियोजनाएं भागीदारी के लिए उपलब्ध बताई गई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, उद्यान, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में संस्थाएं अपनी क्षमता के अनुसार परियोजनाओं से जुड़ सकेंगी। किसी संस्था के पास तकनीकी विशेषज्ञता है, किसी कंपनी के पास आधुनिक उपकरण हैं, किसी विशेषज्ञ के पास विशेष ज्ञान है या कोई नागरिक अपना समय और कौशल देना चाहता है, तो उसे संबंधित जरूरत से जोड़ने की व्यवस्था इस मंच के माध्यम से की जाएगी।
केवल महानगरपालिका की परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा मंच
इस पहल की खास बात यह है कि भागीदार संस्थाएं केवल महानगरपालिका की ओर से उपलब्ध कराई गई परियोजनाओं में ही हिस्सा नहीं लेंगी। वे मुंबई के लिए अपनी नई योजनाएं, तकनीकी समाधान और सामाजिक पहल भी प्रस्तावित कर सकेंगी। इन प्रस्तावों की संबंधित महानगरपालिका विभागों द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक जांच की जाएगी। उपयोगिता, व्यवहार्यता और शहर की वास्तविक जरूरतों से संबंध की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे महानगरपालिका और निजी तथा सामाजिक क्षेत्र के बीच मिलकर नए समाधान विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।
27 कंपनियां और 23 स्वयंसेवी संस्थाएं जुड़ीं
महानगरपालिका के अनुसार, कम समय में ही 27 सामाजिक उत्तरदायित्व भागीदार, 23 स्वयंसेवी संस्थाएं, 56 कार्यान्वयन भागीदार और 500 से अधिक स्वयंसेवक इस पहल से जुड़ चुके हैं। कई बड़ी कंपनियों ने भी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर मुंबई के लिए प्रस्ताव दिए हैं। इनमें एचयूएल, आरपीजी, सीएमएस और नारायणा जैसी संस्थाएं शामिल हैं। संबंधित महानगरपालिका विभाग इन प्रस्तावों की जांच कर रहे हैं।
सामाजिक उत्तरदायित्व का पैसा सीधे महानगरपालिका को नहीं
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व की राशि सीधे महानगरपालिका को स्वीकार या हस्तांतरित करने के बजाय वस्तुओं, उपकरणों, तकनीक, सेवाओं, विशेषज्ञ ज्ञान, कौशल और परियोजना क्रियान्वयन जैसे प्रत्यक्ष योगदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि भागीदार संस्थाएं अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को सीधे उन परियोजनाओं से जोड़ सकें, जहां मुंबई में वास्तविक जरूरत मौजूद है।
नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ
महानगरपालिका का कहना है कि इस पहल का अंतिम लाभ मुंबई के नागरिकों को मिलेगा। स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, उद्यानों, सार्वजनिक स्थानों, स्वच्छता व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञता मिलने से सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय जरूरत के आधार पर परियोजनाएं तैयार होने से अलग-अलग इलाकों की समस्याओं पर अधिक प्रभावी तरीके से काम किया जा सकेगा।
महानगरपालिका और समग्र संस्था के बीच होगा करार
नागरिक सेवाओं में प्रशासनिक सुधार के लिए महानगरपालिका समग्र संस्था के साथ करार करने जा रही है। इसका उद्देश्य सेवा देने की मौजूदा प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा कर उनमें आवश्यक सुधार करना है। महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक अधिकार, जिम्मेदारी और अंतिम निर्णय लेने की शक्ति उसके पास ही रहेगी।
शिकायतों के निपटारे पर विशेष जोर
सुधार प्रक्रिया के तहत नागरिकों की शिकायतों और सहायता की मांग पर समयबद्ध कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। आग, बाढ़, चिकित्सा आपदा या अन्य आपात स्थितियों में अलग-अलग विभागों और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की तैयारी है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एकीकृत शिकायत प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जाएगी।
कम कागजी कार्रवाई और कम कार्यालयी चक्कर
नागरिकों और कारोबारियों के लिए महानगरपालिका से जुड़ी सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी। अनावश्यक दस्तावेज, कार्यालयों के चक्कर और प्रतीक्षा अवधि कम करने पर जोर रहेगा। जहां संभव होगा, सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। नागरिकों को आवेदन या शिकायत की स्थिति की जानकारी भी अधिक स्पष्ट तरीके से उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
अधिकारियों के कामकाज की होगी निगरानी
प्रभाग स्तर से लेकर महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों तक कामकाज की निगरानी के लिए वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे शिकायतों के निपटारे, सेवाओं की स्थिति और विभिन्न विभागों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा संभव होगी। जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और अन्य उपाय किए जाएंगे।
मिशन के रूप में लागू होगी सुधार प्रक्रिया
महानगरपालिका के अनुसार, प्रशासनिक सुधार को चरणबद्ध तरीके से नहीं बल्कि लक्ष्य आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। कम और मध्यम अवधि में ऐसे परिणाम हासिल करने पर जोर रहेगा जिन्हें मापा जा सके और जिनका असर नागरिकों को सीधे महसूस हो। तेज शिकायत निवारण, आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई, कम कागजी कार्रवाई, कम प्रतीक्षा, आसान सेवाएं और अधिक जवाबदेह कार्यप्रणाली इसके प्रमुख लक्ष्य होंगे।
स्वयंसेवकों को भी मिलेगा मौका
मुंबई के विकास में समय, ज्ञान और कौशल के माध्यम से योगदान देने वाले नागरिक भी इस पहल से जुड़ सकेंगे। शिक्षा, तकनीक, पर्यावरण, स्वास्थ्य, जागरूकता, कौशल विकास और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवी योगदान लिया जा सकेगा। युवा, विद्यार्थी, विशेषज्ञ, पेशेवर और सेवानिवृत्त अनुभवी लोग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकेंगे। भागीदारी करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रमाणपत्र, सम्मान और सार्वजनिक पहचान देने की भी व्यवस्था की जाएगी।
उद्देश्य—‘मेरी’ नहीं, ‘हमारी’ मुंबई
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ का व्यापक उद्देश्य मुंबई के विकास को केवल महानगरपालिका की जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए समाज के अलग-अलग वर्गों को उससे जोड़ना है। महानगरपालिका के पास शहर की जरूरतों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जानकारी है, जबकि उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और नागरिकों के पास ज्ञान, कौशल, तकनीक और अन्य संसाधन हैं। इन दोनों क्षमताओं को एक मंच पर लाकर शहर की समस्याओं के नए और टिकाऊ समाधान तैयार करने की कोशिश की जा रही है। महानगरपालिका का मानना है कि इस पहल से नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और उद्योग जगत की भागीदारी को संस्थागत रूप मिलेगा। इससे वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए भी नए समाधान विकसित किए जा सकेंगे।