भामा आसखेड परियोजना के प्रभावित किसानों का आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना,
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मुंबई / अकबर खान
अदालत के आदेश लागू करने की मांग
मुंबई : भामा आसखेड परियोजना से प्रभावित किसानों का मुंबई के आजाद मैदान में 6 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है। किसानों ने अदालत के आदेश लागू करने, मुआवजा देने और जमीन लौटाने की मांग की है।
मुंबई: भामा आसखेड परियोजना के लिए जमीन गंवाने वाले किसानों ने अपने हक और पुनर्वास की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है। प्रदीप होले के नेतृत्व में 6 अक्टूबर 2026 से जारी इस आंदोलन में किसानों ने अदालत के आदेशों पर तत्काल अमल करने, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और पात्र किसानों को जमीन उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इस मामले में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश होने के बावजूद कई वर्षों से उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। प्रशासन को बार-बार आवेदन देने और अलग-अलग स्तरों पर शिकायतें करने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इससे प्रभावित किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
अदालत के आदेशों पर अमल नहीं होने का आरोप
आंदोलनकारियों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय में वर्ष 2010 की रिट याचिका क्रमांक 3767 से जुड़े वर्ष 2012 के आदेश में गट क्रमांक 182 के संबंध में अधिकार मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा उच्च न्यायालय की अवमानना याचिका क्रमांक 325 से जुड़े वर्ष 2013 और 2015 के मामले तथा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और बाद के आदेशों का भी हवाला दिया गया है। किसानों का दावा है कि गट क्रमांक 182 से संबंधित उनका पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में भी कायम रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 2012 के उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। आंदोलनकारियों ने महाराष्ट्र सरकार के राहत एवं पुनर्वास विभाग के वर्ष 2019 और 2022 के अभिलेखों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि संबंधित सरकारी निर्णय को उनके मामले में लागू नहीं माना जा रहा है, जिससे उनका पुनर्वास और जमीन से जुड़ा विवाद अब तक लंबित है।
दिल्ली से मुंबई तक की गई शिकायतें
प्रभावित किसानों के अनुसार, उन्होंने अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय और महाराष्ट्र सरकार के 'आपले सरकार' शिकायत मंच पर भी शिकायतें दर्ज कराई हैं। आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत क्रमांक 122644/सीआर/2026 और महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत क्रमांक 9585/2026 का उल्लेख किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत क्रमांक पीएमओपीजी/0/2026/0188466 और 'आपले सरकार' मंच पर शिकायत क्रमांक डीईपी/पीजीडी/पुणे/2026/6382 दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई है। इन शिकायतों के माध्यम से राहत एवं पुनर्वास विभाग से मामले में हस्तक्षेप करने और किसानों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।
25 साल से न्याय की प्रतीक्षा का दावा
आंदोलनकारियों का कहना है कि किसानों को लंबे समय से आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीन और पुनर्वास से जुड़े मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि करीब 25 वर्षों से प्रभावित किसान परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पुनर्वास में देरी के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद सुनवाई नहीं होने से किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।
मुआवजे के साथ 1 हेक्टेयर 60 आर जमीन देने की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि भामा आसखेड परियोजना से प्रभावित सभी किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही बबुशा धोंडिबा होले को अदालत के आदेश के अनुसार 1 हेक्टेयर 60 आर जमीन तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय संबंधित विभाग को अदालत के आदेशों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। फिलहाल, इस मामले में संबंधित सरकारी विभाग का पक्ष और आदेशों के अनुपालन की आधिकारिक स्थिति उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों की मांगों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।