लेकिन जवाबदेही पर अब भी सवाल बरकरार
Mumbai / Akbar Khan
Mumbai : साकीनाका के खैरानी रोड पर खुले नाले में गिरकर असलम शेख की मौत के बाद उनकी पत्नी अंजुम शेख को महानगरपालिका से 10 लाख रुपये मिले। लेकिन हादसे की जिम्मेदारी और जांच की स्थिति को लेकर सवाल अब भी कायम हैं।
मुंबई। साकीनाका के खैरानी रोड पर खुले नाले के कक्ष में गिरकर जान गंवाने वाले असलम शेख के परिवार को मुंबई महानगरपालिका ने 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दे दी है। उनकी पत्नी अंजुम शेख के खाते में यह रकम 4 अगस्त को जमा की गई। अब सवाल यह है कि पैसा तो मिल गया, लेकिन असलम की मौत के लिए जिम्मेदार कौन था?
अंजुम के खाते में कब पहुंचे 10 लाख?
महानगरपालिका के अनुसार, हादसे के बाद महापौर ऋतु तावड़े ने असलम शेख के परिवार से मुलाकात कर 10 लाख रुपये की मदद देने का आश्वासन दिया था। बैंक संबंधी कागजात और कानूनी वारिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 4 अगस्त को रकम सीधे अंजुम शेख के खाते में जमा की गई। रकम मिलने के बाद अंजुम ने महापौर, जनप्रतिनिधियों और महानगरपालिका प्रशासन का आभार जताया।
असलम शेख की मौत कैसे हुई थी?
2 जुलाई को खैरानी रोड पर जलनिकासी से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान 55 वर्षीय असलम शेख खुले नाले के कक्ष में गिर गए। तलाश के बाद अग्निशमन दल ने उनका शव बरामद किया। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल मौके पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठा। खुले कक्ष के आसपास पर्याप्त घेराबंदी और चेतावनी की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई।
चार अधिकारियों पर कार्रवाई, ठेकेदार भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद महानगरपालिका ने संबंधित विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर जांच शुरू की। ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने काम से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।लेकिन कार्रवाई के बाद भी यह साफ नहीं हो सका कि सुरक्षा से जुड़े काम का आदेश किसने दिया था और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी।
काम का आदेश बना जांच का सबसे बड़ा सवाल
जांच के दौरान काम के आदेश को लेकर अधिकारियों और ठेकेदार के बयानों में अंतर सामने आने की खबरें आईं। ठेकेदार की ओर से यह भी दावा किया गया कि उसका काम का आदेश समाप्त हो चुका था। ऐसे में सवाल उठा कि हादसे से पहले सुरक्षा जाली लगाने का काम आखिर किसके निर्देश पर और किसकी निगरानी में हो रहा था।
अदालत की चेतावनी के बाद भी हुआ हादसा
इस हादसे से कुछ दिन पहले ही बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई में खुले और खतरनाक नाले के कक्षों को लेकर महानगरपालिका से जवाब मांगा था। महानगरपालिका ने सभी 26 विभागों में नाले के कक्षों की जांच और खुले कक्ष मिलने पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था करने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद 2 जुलाई को साकीनाका में हादसा हो गया।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अंजुम शेख को 10 लाख रुपये की सहायता मिल चुकी है। परिवार को आर्थिक राहत भी मिली है। लेकिन इस मामले का दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी जवाब मांगता है—
असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी?
काम का आदेश किसने दिया था?
और जांच के बाद दोषी पाए गए लोगों पर आगे क्या कार्रवाई हुई?
10 लाख रुपये की मदद से परिवार को राहत मिली है, लेकिन इन सवालों के स्पष्ट जवाब ही यह बताएंगे कि साकीनाका हादसे के बाद व्यवस्था ने वास्तव में क्या सीखा।