हज 2027 मेडिकल सर्टिफिकेट: 15 सितंबर की डेडलाइन. मुंबई में अलग मेडिकल सुविधा की मांग
Maharashtra Samachar••9 व्यूज़•6 मिनट पढ़ें
Mumbai : हज 2027 के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट की 15 सितंबर डेडलाइन से पहले मुंबई में अलग काउंटर, अधिक केंद्र और एक महीने की राहत की मांग उठी।
Mumbai / Akbar Khan
मुंबई: हज 2027 की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर नजदीक है। इसी बीच मुंबई में मेडिकल जांच के लिए सीमित सुविधाओं और अस्पतालों में सामान्य मरीजों के साथ हज यात्रियों की साझा कतार को लेकर परेशानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। यात्रियों की ओर से मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की समयसीमा बढ़ाने के साथ-साथ अधिक सरकारी मेडिकल केंद्र और हज यात्रियों के लिए अलग काउंटर शुरू करने की मांग की गई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने 1 सितंबर 2026 को हज 2027 के लिए "मेडिकल स्क्रीनिंग एंड अपलोडिंग ऑफ रिलेवेंट डॉक्यूमेंट्स" से संबंधित सर्कुलर नंबर. 10 जारी किया था। महाराष्ट्र राज्य हज समिति की आधिकारिक सर्कुलर सूची में भी 1 सितंबर को मेडिकल स्क्रीनिंग संबंधी निर्देश दर्ज हैं।
15 सितंबर की डेडलाइन के बीच बढ़ी चिंता
मौजूदा व्यवस्था में हज यात्रियों को मेडिकल स्क्रीनिंग और फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी करनी है। मुंबई में यात्रियों का कहना है कि सीमित केंद्रों पर सामान्य मरीजों और हज यात्रियों के लिए साझा कतार होने से जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्ग यात्रियों और महिलाओं के लिए लंबे समय तक कतार में खड़े रहना परेशानी का कारण बन रहा है। यात्रियों की मांग है कि अंतिम तारीख तक सभी पात्र यात्रियों को प्रक्रिया पूरी करने का पर्याप्त अवसर मिले। इसके लिए 15 सितंबर की मौजूदा समयसीमा को कम से कम एक महीने बढ़ाने की मांग की गई है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में मुंबई के मेडिकल स्क्रीनिंग केंद्रों की कुल संख्या, उनकी प्रतिदिन की जांच क्षमता और कितने यात्रियों की स्क्रीनिंग अभी बाकी है, इसका कोई सार्वजनिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसलिए 15 सितंबर तक सभी यात्रियों की जांच पूरी होना “असंभव” है, ऐसा निश्चित रूप से कहना अभी उचित नहीं होगा।
हज 2027 में मेडिकल स्क्रीनिंग को लेकर क्या है नया प्रावधान?
हज कमेटी ऑफ इंडिया की हज-2027 गाइडलाइंस के अनुसार इस बार दो चरणों में मेडिकल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। पहली स्क्रीनिंग प्रोविजनल सिलेक्शन के बाद और दूसरी बाद के चरण में होगी। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र में अनिवार्य टीकाकरण से संबंधित जानकारी भी शामिल की जाएगी और सेलेक्टेड पिलग्रिम के लिए डिजिटल मेडिकल हैल्थ सर्टिफिकेट की व्यवस्था बताई गई है। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि हज एक कठिन और शारीरिक रूप से डिमांडिंग यात्रा है, जिसमें सऊदी अरब की कठिन जलवायु परिस्थितियों में एक दिन में 25 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ सकता है। इसी वजह से 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रत्येक यात्री के लिए विशेष मेडिकल स्क्रीनिंग का प्रावधान किया गया है। यही वजह है कि मुंबई में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग या प्राथमिकता आधारित मेडिकल व्यवस्था की मांग को केवल सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और यात्री सुरक्षा से जुड़ा विषय भी माना जा रहा है।
मेडिकल सर्टिफिकेट के बाद क्या करना होगा?
मेडिकल जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यात्रियों को आगे की हज प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों और स्वास्थ्य संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। हज-2027 गाइडलाइंस के अनुसार सेलेक्टेड पिलग्रिम के लिए हेल्थ एंड ट्रेनिंग (एच ए टी ) कार्ड की व्यवस्था है। इसके अलावा सभी सेलेक्टेड पिलग्रिम को सऊदी अरब और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की आवश्यकताओं के अनुसार जरूरी वैक्सीनेशन भी लेना होगा। इसलिए मौजूदा मेडिकल स्क्रीनिंग प्रक्रिया को केवल एक सर्टिफिकेट जमा करने की औपचारिकता के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह हज यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों की पूरी प्रक्रिया का हिस्सा है।
मुंबई में अलग मेडिकल काउंटर की मांग क्यों?
मुंबई हज 2027 के निर्धारित एम्बरकेशन पॉइंट्स में शामिल है। एच सी ओ एल की गाइडलाइंस में मुंबई को हज 2027 के लिए एम्बरकेशन प्वाइंट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। ऐसे में यात्रियों की मांग है कि मुंबई जैसे प्रमुख केंद्र पर सामान्य अस्पताल की ओ पी डी व्यवस्था के साथ हज मेडिकल स्क्रीनिंग को मिलाने के बजाय इसके लिए डेडिकेटेड मेडिकल काउंटर या अलग स्क्रीनिंग व्यवस्था बनाई जाए।
मांगों में यह भी शामिल है कि:
* मुंबई में अधिक बीएमसी और सरकारी अस्पतालों में हज मेडिकल स्क्रीनिंग शुरू की जाए। * हज यात्रियों के लिए अलग लाइन और डेडिकेटेड काउंटर बनाया जाए। * 60 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों को प्रायोरिटी या विशेष सुविधा दी जाए। * महिलाओं के लिए भीड़ से अलग और सुविधाजनक व्यवस्था की जाए। * जरूरत पड़ने पर विशेष हज मेडिकल कैंपस आयोजित किए जाएं। * लंबी कतार से बचने के लिए टोकन या अपॉइंटमेंट आधारित व्यवस्था पर विचार किया जाए।
प्रशासन के सामने अब क्या चुनौती है?
15 सितंबर की समयसीमा में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में केवल डेडलाइन बढ़ाना ही पर्याप्त समाधान नहीं होगा। यदि प्रशासन समयसीमा बढ़ाता है, तो उसके साथ मेडिकल स्क्रीनिंग की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी होगा।इसके लिए बीएमसी, महाराष्ट्र राज्य हज समिति और हज कमेटी ऑफ इंडिया के स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि मुंबई में वर्तमान में कितने अधिकृत मेडिकल केंद्र उपलब्ध हैं, रोजाना कितने यात्रियों की जांच की जा रही है और डेडलाइन तक कितने यात्रियों की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। यही आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि मौजूदा व्यवस्था 15 सितंबर की समयसीमा को पूरा करने के लिए पर्याप्त है या अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता है।
यात्रियों की प्रमुख मांगें
मुंबई के हज यात्रियों की ओर से प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं—मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर से एक महीने बढ़ाई जाए, मुंबई में मेडिकल स्क्रीनिंग केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और बीएमसी अस्पतालों में सामान्य मरीजों से अलग हज यात्रियों के लिए डेडिकेटेड क्यू तथा विशेष काउंटर शुरू किए जाएं। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए प्राथमिकता आधारित व्यवस्था तथा विशेष मेडिकल कैंप शुरू करने की मांग भी प्रक्रिया को अधिक सुगम बना सकती है।फिलहाल हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक सर्कुलर सूची में 1 सितंबर 2026 का मेडिकल स्क्रीनिंग संबंधी सर्कुलर नंबर 10 उपलब्ध है और महाराष्ट्र राज्य हज समिति की सूची में भी इसकी पुष्टि होती है। 15 सितंबर की मौजूदा समयसीमा के बीच अब यात्रियों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन अतिरिक्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराता है या डेडलाइन में राहत देता है।